(राग सारंग)
आरती राधिका-लाल पर वारौं।
सहज अति चारु प्रति अंग भूषन झलक,
माधुरी रूप नैंननि निहारौं॥ [1]
कोटि रति काम विवि रूप अभिराम पर,
इंदु पग नखनि पर टारौं।
दिनहिं सुख-रासि मृदुहासि 'ध्रुव' निरखि कैं,
सहज ही नैंनमन वारि तनडारौं॥ [2]
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (20)
मैं अपनी आराध्या श्री राधिका और प्राण-प्रियतम लाल जी (श्री श्यामसुन्दर) की आरती उतारती हुई, उनके सहज सुंदर अंग-प्रत्यंगों पर सुशोभित दिव्य आभूषणों की अनुपम माधुरी और अपार रूप-सौंदर्य को अपने नेत्रों से निहारती रहूँ। [1]
युगल-सरकार के इस परम रमणीय और मनमोहन रूप पर कोटि-कोटि कामदेव और रति के सौंदर्य को न्यौछावर करती हूँ, तथा उनके श्रीचरणों के नखों की दिव्य चमक (नख-छवि) पर कोटि-कोटि चंद्रमाओं को वारती हूँ। श्री ध्रुवदास जी कहते हैं कि अनंत आनंद की राशि इस युगल जोड़ी की मंद-मंद मधुर मुस्कान का दर्शन करके, मैं सहज भाव से अपने नेत्र, मन और तन अर्थात् सर्वस्व उन पर न्यौछावर कर दूँ। [2]
आरती राधिका-लाल पर वारौं।
सहज अति चारु प्रति अंग भूषन झलक,
माधुरी रूप नैंननि निहारौं॥ [1]
कोटि रति काम विवि रूप अभिराम पर,
इंदु पग नखनि पर टारौं।
दिनहिं सुख-रासि मृदुहासि 'ध्रुव' निरखि कैं,
सहज ही नैंनमन वारि तनडारौं॥ [2]
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (20)
मैं अपनी आराध्या श्री राधिका और प्राण-प्रियतम लाल जी (श्री श्यामसुन्दर) की आरती उतारती हुई, उनके सहज सुंदर अंग-प्रत्यंगों पर सुशोभित दिव्य आभूषणों की अनुपम माधुरी और अपार रूप-सौंदर्य को अपने नेत्रों से निहारती रहूँ। [1]
युगल-सरकार के इस परम रमणीय और मनमोहन रूप पर कोटि-कोटि कामदेव और रति के सौंदर्य को न्यौछावर करती हूँ, तथा उनके श्रीचरणों के नखों की दिव्य चमक (नख-छवि) पर कोटि-कोटि चंद्रमाओं को वारती हूँ। श्री ध्रुवदास जी कहते हैं कि अनंत आनंद की राशि इस युगल जोड़ी की मंद-मंद मधुर मुस्कान का दर्शन करके, मैं सहज भाव से अपने नेत्र, मन और तन अर्थात् सर्वस्व उन पर न्यौछावर कर दूँ। [2]

