अन्यन्त्र हि कृतं पापं तीर्थमासाद्य गच्छति।
तीर्थे तु यत्कृतं पापं वज्रलेपो भविष्यति॥
- वराहपुराण, मथुरा महात्म (165.57)
अन्य स्थान पर किया गया पाप तीर्थ में नष्ट हो जाता है, परंतु तीर्थ पर किया गया पाप वज्र लेप की तरह दृढ़ हो जाता है।
तीर्थे तु यत्कृतं पापं वज्रलेपो भविष्यति॥
- वराहपुराण, मथुरा महात्म (165.57)
अन्य स्थान पर किया गया पाप तीर्थ में नष्ट हो जाता है, परंतु तीर्थ पर किया गया पाप वज्र लेप की तरह दृढ़ हो जाता है।

