धन-धन बृन्दाविपिन बसैं हलवाई।
सुन्दर सुन्दर करैं जलेबी, खुर्मा खाजल और मलाई॥ [1]
पेड़ा करत मसाले वारे, बरफी संग बनाई।
अभयराम ये सौंज अमनियाँ, लाला भोग लगाई॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (95)
श्री वृन्दावन धाम में निवास करने वाले हलवाइ अत्यंत धन्य और सौभाग्यशाली है। वे परम प्रेम से अत्यंत सुंदर जलेबी, खुरमा, खाजा और मलाई इत्यादि मिष्ठान तैयार करते हैं। [1]
वे सुगंधित मसालों से युक्त पेड़े तथा बर्फी बनाते हैं। श्री अभयराम जी कहते हैं कि इन हलवाइयों के द्वारा निर्मित शुद्ध और अमनिया (परम पवित्र) सामग्रियों को लाला (श्री श्यामा-श्याम) बड़े चाव से भोग रूप में स्वीकार करते हैं। [2]
सुन्दर सुन्दर करैं जलेबी, खुर्मा खाजल और मलाई॥ [1]
पेड़ा करत मसाले वारे, बरफी संग बनाई।
अभयराम ये सौंज अमनियाँ, लाला भोग लगाई॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (95)
श्री वृन्दावन धाम में निवास करने वाले हलवाइ अत्यंत धन्य और सौभाग्यशाली है। वे परम प्रेम से अत्यंत सुंदर जलेबी, खुरमा, खाजा और मलाई इत्यादि मिष्ठान तैयार करते हैं। [1]
वे सुगंधित मसालों से युक्त पेड़े तथा बर्फी बनाते हैं। श्री अभयराम जी कहते हैं कि इन हलवाइयों के द्वारा निर्मित शुद्ध और अमनिया (परम पवित्र) सामग्रियों को लाला (श्री श्यामा-श्याम) बड़े चाव से भोग रूप में स्वीकार करते हैं। [2]

