श्रीबिपुल बिहारनिदास को, मैं पायो पूरो संग।
श्रीनागरीदास फूलत सदा, देखि दूहुनि को रंग॥
- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (17)
श्री नागरीदास जी कहते हैं कि उन्हें श्री विट्ठलविपुल देव जी तथा श्री बिहारिन देव जी का पूर्ण सत्संग व भली-भाँति संग प्राप्त हुआ है। ऐसे अनन्य रसिकों के प्रभाव से श्री प्रिया-प्रियतम के प्रति जो अनन्य अनुराग प्रकट हुआ है, उससे उनका चित्त नित्य प्रफुल्लित और आनंदित रहता है।
श्रीनागरीदास फूलत सदा, देखि दूहुनि को रंग॥
- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (17)
श्री नागरीदास जी कहते हैं कि उन्हें श्री विट्ठलविपुल देव जी तथा श्री बिहारिन देव जी का पूर्ण सत्संग व भली-भाँति संग प्राप्त हुआ है। ऐसे अनन्य रसिकों के प्रभाव से श्री प्रिया-प्रियतम के प्रति जो अनन्य अनुराग प्रकट हुआ है, उससे उनका चित्त नित्य प्रफुल्लित और आनंदित रहता है।

