धन हित सटकौ अनत कौ, दै वृन्दावन पीठ।
दामोदर जन यो कहत, फोरौ अपनी दीठ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (16)
यदि धन-संपदा की तृष्णा के वशीभूत होकर मैं श्रीधाम वृन्दावन को पीठ दिखाकर किसी अन्य स्थल की ओर पलायन करूँ, तो मैं अपने ही नेत्र फोड़ लेने योग्य हूँ।।
दामोदर जन यो कहत, फोरौ अपनी दीठ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (16)
यदि धन-संपदा की तृष्णा के वशीभूत होकर मैं श्रीधाम वृन्दावन को पीठ दिखाकर किसी अन्य स्थल की ओर पलायन करूँ, तो मैं अपने ही नेत्र फोड़ लेने योग्य हूँ।।

