दशा मुझ दीन की भगवन सम्भालोगे तो क्या होगा।
अगर चरणों की सेवा में लगा लोगे तो क्या होगा॥ [1]
मैं नामी पातकी हूँ और नामी पाप हर तुम हो।
जो लज्जा दोनों नामों की बचा लोगे तो क्या होगा॥ [2]
जिन्होंने तुमको करुणाकर पतित पावन बनाया है।
उन्हीं पतितों को तुम पावन बना दोगे तो क्या होगा॥ [3]
यहाँ सब मुझसे कहते हैं तू मेरा है तू मेरा है।
मैं किसका हूँ ये झगड़ा तुम मिटा दोगे तो क्या होगा॥ [4]
अजामिल, गीध, गनिका जिस दया गंगा में तारे हैं।
उसी में 'बिन्दु' सा पापी मिला लोगे तो क्या होगा॥ [5]
- श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
हे भगवन्! यदि आप मुझ दीन-हीन की दशा सम्भाल लेंगे और मुझे अपने चरणों की सेवा में लगा लेंगे, तो इसमें आपका क्या बिगड़ेगा? [1]
मैं जग-प्रसिद्ध पापी हूँ और आप प्रसिद्ध पाप-हारी हैं; यदि आप हम दोनों के इन नामों की लाज रख लेंगे, तो आपकी ही महिमा बढ़ेगी। [2]
जिन पतितों ने आपको 'करुणाकर' और 'पतित-पावन' की उपाधि दी है, यदि आप उन्हीं पतितों का उद्धार कर उन्हें पावन बना देंगे, तो इसमें क्या आपका क्या घटेगा? [3]
संसार में सब मुझ पर अपना-अपना अधिकार जताते हैं; मैं वास्तव में किसका हूँ, इस संशय और झगड़े को यदि आप स्वयं मिटा देंगे तो अति कृपा होगी। [4]
जिस दया रूपी गंगा में आपने अजामिल, गीध और गणिका जैसे महापापियों का उद्धार कर दिया, उसी दया-सिंधु में मुझ 'बिन्दु' जैसे छोटे से पापी को समा लेंगे, तो आपकी करुणा की ही जय-जयकार होगी। [5]
अगर चरणों की सेवा में लगा लोगे तो क्या होगा॥ [1]
मैं नामी पातकी हूँ और नामी पाप हर तुम हो।
जो लज्जा दोनों नामों की बचा लोगे तो क्या होगा॥ [2]
जिन्होंने तुमको करुणाकर पतित पावन बनाया है।
उन्हीं पतितों को तुम पावन बना दोगे तो क्या होगा॥ [3]
यहाँ सब मुझसे कहते हैं तू मेरा है तू मेरा है।
मैं किसका हूँ ये झगड़ा तुम मिटा दोगे तो क्या होगा॥ [4]
अजामिल, गीध, गनिका जिस दया गंगा में तारे हैं।
उसी में 'बिन्दु' सा पापी मिला लोगे तो क्या होगा॥ [5]
- श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
हे भगवन्! यदि आप मुझ दीन-हीन की दशा सम्भाल लेंगे और मुझे अपने चरणों की सेवा में लगा लेंगे, तो इसमें आपका क्या बिगड़ेगा? [1]
मैं जग-प्रसिद्ध पापी हूँ और आप प्रसिद्ध पाप-हारी हैं; यदि आप हम दोनों के इन नामों की लाज रख लेंगे, तो आपकी ही महिमा बढ़ेगी। [2]
जिन पतितों ने आपको 'करुणाकर' और 'पतित-पावन' की उपाधि दी है, यदि आप उन्हीं पतितों का उद्धार कर उन्हें पावन बना देंगे, तो इसमें क्या आपका क्या घटेगा? [3]
संसार में सब मुझ पर अपना-अपना अधिकार जताते हैं; मैं वास्तव में किसका हूँ, इस संशय और झगड़े को यदि आप स्वयं मिटा देंगे तो अति कृपा होगी। [4]
जिस दया रूपी गंगा में आपने अजामिल, गीध और गणिका जैसे महापापियों का उद्धार कर दिया, उसी दया-सिंधु में मुझ 'बिन्दु' जैसे छोटे से पापी को समा लेंगे, तो आपकी करुणा की ही जय-जयकार होगी। [5]

