कामधेनु कलपत रही, हौं न भई ब्रज गाय।
राधा देती दोहनी, मोहन दुहते आय॥
- ब्रज के दोहे
समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली कामधेनु जैसी दिव्य गाय भी यह लालसा रखती है कि मैं ब्रज की साधारण गाय क्यों न हुई। यदि मैं ब्रज की गाय होती, तो श्रीराधा अपने हाथों से मेरे दोहनी रखतीं और श्रीमोहन स्वयं आकर बड़े लाड़-प्यार से मेरा दूध दुहते।
राधा देती दोहनी, मोहन दुहते आय॥
- ब्रज के दोहे
समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली कामधेनु जैसी दिव्य गाय भी यह लालसा रखती है कि मैं ब्रज की साधारण गाय क्यों न हुई। यदि मैं ब्रज की गाय होती, तो श्रीराधा अपने हाथों से मेरे दोहनी रखतीं और श्रीमोहन स्वयं आकर बड़े लाड़-प्यार से मेरा दूध दुहते।

