लगी समाधि बिहार की, छुटै नहिं दिन रैंन।
गौर स्याम बिलसैं सदा, श्री हरिदासी ऐंन॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (319)
श्री हरिदासी (स्वामी श्री हरिदास जी) के निकुंज-धाम में श्री गौर-श्याम स्वरूप वाले श्यामा-कुंजबिहारी सदैव नित्य विहार परायण हैं जहाँ इनकी युगल-विहार रूपी ऐसी अखंड समाधि लगी हुई, जो दिन-रात कभी भी भंग नहीं होती है।
गौर स्याम बिलसैं सदा, श्री हरिदासी ऐंन॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (319)
श्री हरिदासी (स्वामी श्री हरिदास जी) के निकुंज-धाम में श्री गौर-श्याम स्वरूप वाले श्यामा-कुंजबिहारी सदैव नित्य विहार परायण हैं जहाँ इनकी युगल-विहार रूपी ऐसी अखंड समाधि लगी हुई, जो दिन-रात कभी भी भंग नहीं होती है।

