कुँवरि छबीली अमित छबि, छिन-छिन औरे-और।
रहि गये चितवत चित्र से, परम रसिक-सिरमौर॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, श्रृंगार शत (1.54)
नित्य-किशोरी श्री राधा का सौंदर्य असीम और अपार है, जो प्रत्येक क्षण नित-नवीन रूप धारण करता रहता है। उनका दर्शन करके रसिक-शिरोमणि श्री श्यामसुंदर भी स्तब्ध होकर चित्रलिखित (चित्र की भाँति अचल) खड़े के खड़े रह गए हैं।
रहि गये चितवत चित्र से, परम रसिक-सिरमौर॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, श्रृंगार शत (1.54)
नित्य-किशोरी श्री राधा का सौंदर्य असीम और अपार है, जो प्रत्येक क्षण नित-नवीन रूप धारण करता रहता है। उनका दर्शन करके रसिक-शिरोमणि श्री श्यामसुंदर भी स्तब्ध होकर चित्रलिखित (चित्र की भाँति अचल) खड़े के खड़े रह गए हैं।

