रस मैं मगन बिहारिनी दिय - श्री रूपरसिक देवाचार्य, रस मंजरी (2)

रस मैं मगन बिहारिनी दिय - श्री रूपरसिक देवाचार्य, रस मंजरी (2)

रस मैं मगन बिहारिनी, दिय पियकै भुज ग्रींव।
सेज सलोंनी मैं लसैं, सव शोभा की सींव॥

- श्री रूपरसिक देवाचार्य, रस मंजरी (2)

परम रस में निमग्न श्री विहारिणीजी (श्री राधा) ने अपने प्रियतम श्री कृष्ण के गले में अपनी भुजा डाली हुई है। इस अत्यंत सुंदर और सलोनी शय्या पर विराजमान यह युगल समस्त सौंदर्य की चरम सीमा प्रतीत हो रहा है।