ऐसौ अद्भुत प्रेम है दम्पति - श्री सरस माधुरी

ऐसौ अद्भुत प्रेम है दम्पति - श्री सरस माधुरी

ऐसौ अद्भुत प्रेम है, दम्पति अंगन माँहिं।
रहत निरन्तर संग नित, तऊ तृपति ह्वै नाहिं॥

- श्री सरस माधुरी

दिव्य दम्पति के अंगों में परस्पर ऐसा अद्भुत और विलक्षण प्रेम व्याप्त है कि वे नित्य निरंतर सर्वदा एक-दूसरे के साथ ही रहते हैं, फिर भी उन्हें कभी तृप्ति नहीं होती है।