हीरन के हठी हार गरे - श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (60)

हीरन के हठी हार गरे - श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (60)

(सवैया)
हीरन के हठी हार गरे, गजरा गज मोतिन के सुखदानी। [1]
जोरे जरी भरी मांग सिन्दूर सु, रम्भा रमा रति रूप नसानी॥ [2]
पन्ना प्रवालन लालन की, पसरी किरनै सुखमा सरसानी। [3]
को है त्रिलोक मैं मोहै नहीं, लखि सोहै सुहागिन राधिकारानी॥ [4]

- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (60)

श्री राधिका रानी के गले में हीरों के मनमोहक हार सुशोभित हैं, तथा वे गजमुक्ताओं (श्रेष्ठ मोतियों) के अत्यंत सुखदायक गजरे धारण किए हुए हैं। [1]

उनकी सुनहरी जरी से सजी हुई और सिन्दूर से भरी हुई सुंदर माँग को देखकर रम्भा, लक्ष्मी और रति जैसी परम सुंदरियों का रूप-सौंदर्य भी फीका पड़ जाता है। [2]

उनके आभूषणों में जड़े हुए पन्नों, मूंगों और लाल मणियों की कांतियुक्त किरणें चारों ओर फैल रही हैं, जिससे उनकी सरस सुंदरता और अधिक बढ़ गई है। [3]

ऐसी परम सुहागिनी और अत्यंत सुशोभित होने वाली श्री राधिका रानी की इस अनुपम छवि को देखकर भला तीनों लोकों में ऐसा कौन है जो मोहित न हो जाए। [4]