अतः सर्वात्मना शश्वद् - श्री वल्लभाचार्य, चतुः श्लोकी (4)

अतः सर्वात्मना शश्वद् - श्री वल्लभाचार्य, चतुः श्लोकी (4)

अतः सर्वात्मना शश्वद् गोकुलेश्वरपादयोः।
स्मरणं भजनं चापि न त्याज्यमिति मे मतिः॥

- श्री वल्लभाचार्य, चतुः श्लोकी (4)

अत: सब प्रकार से सर्वदा श्रीगोकुलेश्वर (श्री कृष्ण) के चरणकमलों का स्मरण और भजन कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए, यही मेरा दृढ़ मत है।