जय श्रीराधावल्लभलाल।
श्रीवृन्दावन रविजा तीरे, तहाँ बसत सब काल॥ [1]
रसिक अनन्यनि के जीवन धन, करुणा सिन्धु कृपाल।
शोभा अमित अपार लाड़िले, रूप राशि छवि जाल॥ [2]
इन्हें छाँड़ि औरन कू ध्यावत, परत काल के गाल।
‘वासुदेव हित’ चरण शरण ह्वै, निरख लाड़िली लाल॥ [3]
- मगन अली (श्री वासुदेवजी)
श्री राधावल्लभ लाल की जय हो, जो श्री वृन्दावन में यमुना जी के तट पर सर्वदा निवास करते हैं। [1]
वे ही अनन्य रसिकों के जीवन का एकमात्र धन, करुणा के सागर और अत्यंत कृपालु हैं। इन लाड़िली-लाल की शोभा अमित और अपार है तथा वे अनुपम रूप की राशि और दिव्य सौंदर्य का समूह हैं। [2]
इन्हें छोड़कर जो अन्य किसी का ध्यान करते हैं, वे काल के गाल में समा जाते हैं। इसलिए श्री हित वासुदेव (मगन अलि) कहते हैं कि इनके चरणों की शरण लेकर सदैव श्री लाड़िली-लाल के स्वरूप को निहारते रहो। [3]
श्रीवृन्दावन रविजा तीरे, तहाँ बसत सब काल॥ [1]
रसिक अनन्यनि के जीवन धन, करुणा सिन्धु कृपाल।
शोभा अमित अपार लाड़िले, रूप राशि छवि जाल॥ [2]
इन्हें छाँड़ि औरन कू ध्यावत, परत काल के गाल।
‘वासुदेव हित’ चरण शरण ह्वै, निरख लाड़िली लाल॥ [3]
- मगन अली (श्री वासुदेवजी)
श्री राधावल्लभ लाल की जय हो, जो श्री वृन्दावन में यमुना जी के तट पर सर्वदा निवास करते हैं। [1]
वे ही अनन्य रसिकों के जीवन का एकमात्र धन, करुणा के सागर और अत्यंत कृपालु हैं। इन लाड़िली-लाल की शोभा अमित और अपार है तथा वे अनुपम रूप की राशि और दिव्य सौंदर्य का समूह हैं। [2]
इन्हें छोड़कर जो अन्य किसी का ध्यान करते हैं, वे काल के गाल में समा जाते हैं। इसलिए श्री हित वासुदेव (मगन अलि) कहते हैं कि इनके चरणों की शरण लेकर सदैव श्री लाड़िली-लाल के स्वरूप को निहारते रहो। [3]

