कबहूँ गहवर बन विचर कबहुँ - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (82)

कबहूँ गहवर बन विचर कबहुँ - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (82)

कबहूँ गहवर बन विचर, कबहुँ श्रीबन धाम।
ललित लड़ैती छबि निरख, गौर श्याम अभिराम॥

- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (82)

कभी बरसाना के गहवर वन में और कभी श्री धाम वृंदावन में विचरण करते हुए, परम सुंदर और आनंददायक गौर वर्ण की श्री राधा और श्याम वर्ण के श्री कृष्ण की अत्यंत मनमोहक युगल छवि का निरंतर अवलोकन करता रहूँ।