रंग सरोवर श्री बिपुन, प्रिया-लाल बिबि हंस।
अचवत अधर मधुर रसै, रसिक कमल अवतंस॥
- श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (38)
श्रीवृंदावन रूपी रंग-सरोवर में श्रीप्रिया-लाल दोनों सुंदर हंसों के समान विहार-क्रीड़ा कर रहे हैं। वे परस्पर अधरों के मधुर रस का आस्वादन करते हैं और उनके इस प्रेम-विहार को रसिकजन कमलों के समान उस सरोवर की शोभा बढ़ाते हुए निहारते रहते हैं।
अचवत अधर मधुर रसै, रसिक कमल अवतंस॥
- श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (38)
श्रीवृंदावन रूपी रंग-सरोवर में श्रीप्रिया-लाल दोनों सुंदर हंसों के समान विहार-क्रीड़ा कर रहे हैं। वे परस्पर अधरों के मधुर रस का आस्वादन करते हैं और उनके इस प्रेम-विहार को रसिकजन कमलों के समान उस सरोवर की शोभा बढ़ाते हुए निहारते रहते हैं।

