मेरी स्वामिनी सुख-कारिनि राजति - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (14)

मेरी स्वामिनी सुख-कारिनि राजति - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (14)

(राग देवगंधार)
मेरी स्वामिनी सुख-कारिनि।
राजति नवल-निकुंज-भवन में, प्रीतम-संग-बिहारिनि॥ [1]
उठीं उनींदी सुभग सेज पर, स्याम-भुजा-उर-धारिनि।
सोछबि सरस बसी "ब्रजनिधि" उर, कृपा-कटाछ-निहारिनि॥ [2]

- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (14)

मेरी स्वामिनी श्रीराधा समस्त सुखों को प्रदान करने वाली हैं। वे श्री बिहारिणी रानी, नवल निकुंज-भवन में अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के संग सुशोभित हो रही हैं। [1]

वे सुंदर शय्या पर नींद से अलसाई हुई उठी हैं और उन्होंने प्रियतम श्यामसुंदर की भुजा को अपने हृदय पर धारण किया हुआ है। श्री ब्रजनिधि कहते हैं कि अपनी कृपापूर्ण तिरछी चितवन से निहारने वाली उनकी वह अत्यंत सरस छवि मेरे हृदय में सदा के लिए बस गई है। [2]