जा रज ही के लोभ सौं, वत्स रूप गहि स्याम।
स्वाद लेत डोले विपिन, रसना सौं दिन जाँम॥
- श्री किशोरी अलि (रत्न अलि को पत्र-व्यवहार)
जिस श्री धाम वृंदावन की परम पावन रज के लोभ के कारण ही श्रीकृष्ण ने वत्स-रूप धारण किया और दिन-रात अपनी जिह्वा से उस रज का आस्वादन करते हुए वन-वन में विचरते रहे, ऐसे श्री धाम वृन्दावन की रज को प्रणाम है।
स्वाद लेत डोले विपिन, रसना सौं दिन जाँम॥
- श्री किशोरी अलि (रत्न अलि को पत्र-व्यवहार)
जिस श्री धाम वृंदावन की परम पावन रज के लोभ के कारण ही श्रीकृष्ण ने वत्स-रूप धारण किया और दिन-रात अपनी जिह्वा से उस रज का आस्वादन करते हुए वन-वन में विचरते रहे, ऐसे श्री धाम वृन्दावन की रज को प्रणाम है।

