बेननि के नैननि सों, दरस्यो युगल सरूप।
नैननि के वैननि सों, बरन्यो बरन अनूप॥
- श्री वल्लभ रसिक जी, श्री वल्लभ रसिक जी की वाणी (54)
वाणी रूपी नेत्रों से रसिक जनों ने श्री युगल-सरकार का दर्शन किया, और अपने नेत्रों की वाणी से उनकी अनुपम रूप-माधुरी का वर्णन किया।
नैननि के वैननि सों, बरन्यो बरन अनूप॥
- श्री वल्लभ रसिक जी, श्री वल्लभ रसिक जी की वाणी (54)
वाणी रूपी नेत्रों से रसिक जनों ने श्री युगल-सरकार का दर्शन किया, और अपने नेत्रों की वाणी से उनकी अनुपम रूप-माधुरी का वर्णन किया।

