टेढ़े हू सुन्दर नैन टेढ़े मुख कहै वैन,
टेढ़ी हू मुकुट बात टेढ़ी कछ कह गयो। [1]
टेढ़े घुघरारे बाल टेढ़ी गल फूलमाल,
टेढ़ी बुलाक मेरे चित्तमें बसै गयो॥ [2]
टेढ़े पग ऊपर नूपुर झनकार करें,
बाँसुरी बजाय मेरे चित्तकों चुरैगयो। [3]
ऐसी तेरी टेढ़ीनको ध्यान धरै मायाराम,
लटपटी पाग में लपेट मन लै गयौ॥ [4]
- श्री मायाराम
त्रिभंगीलाल श्री कृष्ण के टेढ़े-सुंदर नयन, टेढ़े मुख से कहे गए रसमय वचन, टेढ़ा मुकुट और उनकी रहस्यमयी बाते मन को मोह लेती हैं। [1]
उनके टेढ़े घुँघराले केश, गले की टेढ़ी वैजयंती माला और नासिका की सुशोभित बुलाक मेरे चित्त में आकर बस गई है। [2]
उनके टेढ़े चरणों में नूपुर झनकार करते हैं और वे मधुर बाँसुरी मेरे चित्त को चुरा ले गए हैं। [3]
श्री मायाराम जी कहते हैं कि श्री कृष्ण की इस त्रिभंगी-टेढ़ी छबि और लटपटी पाग का ध्यान धरते ही मेरा मन उन्हीं में सर्वथा समा गया है। [4]
टेढ़ी हू मुकुट बात टेढ़ी कछ कह गयो। [1]
टेढ़े घुघरारे बाल टेढ़ी गल फूलमाल,
टेढ़ी बुलाक मेरे चित्तमें बसै गयो॥ [2]
टेढ़े पग ऊपर नूपुर झनकार करें,
बाँसुरी बजाय मेरे चित्तकों चुरैगयो। [3]
ऐसी तेरी टेढ़ीनको ध्यान धरै मायाराम,
लटपटी पाग में लपेट मन लै गयौ॥ [4]
- श्री मायाराम
त्रिभंगीलाल श्री कृष्ण के टेढ़े-सुंदर नयन, टेढ़े मुख से कहे गए रसमय वचन, टेढ़ा मुकुट और उनकी रहस्यमयी बाते मन को मोह लेती हैं। [1]
उनके टेढ़े घुँघराले केश, गले की टेढ़ी वैजयंती माला और नासिका की सुशोभित बुलाक मेरे चित्त में आकर बस गई है। [2]
उनके टेढ़े चरणों में नूपुर झनकार करते हैं और वे मधुर बाँसुरी मेरे चित्त को चुरा ले गए हैं। [3]
श्री मायाराम जी कहते हैं कि श्री कृष्ण की इस त्रिभंगी-टेढ़ी छबि और लटपटी पाग का ध्यान धरते ही मेरा मन उन्हीं में सर्वथा समा गया है। [4]

