प्रिया स्याम-सँग जागी है सोभित - श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (9)

प्रिया स्याम-सँग जागी है सोभित - श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (9)

(राग बिलावल)
प्रिया स्याम-सँग जागी है।
सोभित कनक-कपोल-ओप पर,
बसन-छाप-छबि लागी है॥ [1]
अधरनि-रंग, बिथुरी अलकावलि,
सुरत-रंग अनुरागी है।
श्रीबीठलविपुल कुंज की क्रीड़ा,
काम-केलि-रस पागी है॥ [2]

- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (9)

श्रीप्रिया जी रात भर प्रियतम श्यामसुंदर के साथ जागती रही हैं। उनके सुवर्ण के समान कांतियुक्त कपोलों की पर प्रियतम की दसनाबलि का चिह्न अंकित है॥ [1]

उनके अधरों पर अनुराग-रंग लगा है, केश-राशि बिखरी हुई है और वे परस्पर सुरत विहार रस में सराबोर हैं। श्रीविठ्ठलविपुल जी कहते हैं कि नित्य निकुंजेश्वरी श्री राधा महारानी जू निकुंज की यह दिव्य विहार-क्रीड़ा काम-केलि के मधुर रस में पूरी तरह पगी हुई है। [2]