धन-जोवन-जन-ज्ञान-बल सब गुमान के - श्री कान्त किशोर, कान्त रसिक जी की वाणी, दोहा (2)

धन-जोवन-जन-ज्ञान-बल सब गुमान के - श्री कान्त किशोर, कान्त रसिक जी की वाणी, दोहा (2)

धन-जोवन-जन-ज्ञान-बल, सब गुमान के मूल।
इनसों 'कान्त' न पाइये, केलि-कुंज की कूल॥

- श्री कान्त किशोर, कान्त रसिक जी की वाणी, दोहा (2)

धन, यौवन, स्वजन, ज्ञान और बल—ये सभी केवल अहंकार (गुमान) उत्पन्न करने के मूल कारण हैं. श्री कान्त किशोर जी कहते हैं कि इन साधनों के बल पर श्री वृन्दावन की रसमय केलि कदापि प्राप्त नहीं की जा सकती।