लेत न सुख हरि भक्ति को, सकल सुखनि कौ सार।
कहा भयौ नृपहू भये, ढोवत जग बेगार॥
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह)
जो मनुष्य समस्त सुखों के सार-रूप श्री हरि की भक्ति के आनंद को ग्रहण नहीं करता, वह यदि राजा भी बन जाए तो क्या लाभ; वह तो केवल इस संसार की व्यर्थ बेगार ही ढो रहा है।
कहा भयौ नृपहू भये, ढोवत जग बेगार॥
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह)
जो मनुष्य समस्त सुखों के सार-रूप श्री हरि की भक्ति के आनंद को ग्रहण नहीं करता, वह यदि राजा भी बन जाए तो क्या लाभ; वह तो केवल इस संसार की व्यर्थ बेगार ही ढो रहा है।

