(सवैया)
बलि जाऊं सदा इन नैनन पै, बलिहारी छटा पे होता रहूँ। [1]
भूलूँ न नाम तुम्हारा प्रभो, चाहे जाग्रत स्वप्न में सोता रहूँ॥ [2]
श्री कृष्ण ही कृष्ण पुकारा करूं, निज आंसुओं से मुख धोता रहूं। [3]
ब्रज राज तुम्हारे वियोग में मैं, यूँ ही निरंतर रोता रहूं॥ [4]
- ब्रज के सवैया
मैं सदा प्रभु के इन नयनों पर न्योछावर होता रहूँ और आपकी इस सुंदर छटा पर निरंतर बलिहारी जाता रहूँ। [1]
हे प्रभु! चाहे मैं जागता रहूँ, स्वप्न देखता रहूँ अथवा सोता रहूँ, किसी भी अवस्था में मैं आपके नाम को कभी न भूलूँ। [2]
मैं निरंतर 'श्री कृष्ण, कृष्ण' ही पुकारता रहूँ और आपके विरह में बहने वाले अपने आँसुओं से अपने मुख को धोता रहूँ। [3]
हे ब्रजराज! आपके वियोग में मैं इसी प्रकार सदा निरंतर अश्रु बहाता रहूँ। [4]
बलि जाऊं सदा इन नैनन पै, बलिहारी छटा पे होता रहूँ। [1]
भूलूँ न नाम तुम्हारा प्रभो, चाहे जाग्रत स्वप्न में सोता रहूँ॥ [2]
श्री कृष्ण ही कृष्ण पुकारा करूं, निज आंसुओं से मुख धोता रहूं। [3]
ब्रज राज तुम्हारे वियोग में मैं, यूँ ही निरंतर रोता रहूं॥ [4]
- ब्रज के सवैया
मैं सदा प्रभु के इन नयनों पर न्योछावर होता रहूँ और आपकी इस सुंदर छटा पर निरंतर बलिहारी जाता रहूँ। [1]
हे प्रभु! चाहे मैं जागता रहूँ, स्वप्न देखता रहूँ अथवा सोता रहूँ, किसी भी अवस्था में मैं आपके नाम को कभी न भूलूँ। [2]
मैं निरंतर 'श्री कृष्ण, कृष्ण' ही पुकारता रहूँ और आपके विरह में बहने वाले अपने आँसुओं से अपने मुख को धोता रहूँ। [3]
हे ब्रजराज! आपके वियोग में मैं इसी प्रकार सदा निरंतर अश्रु बहाता रहूँ। [4]

