अब ना बनी तो फिर ना बनेगी॥
नर तन बार बार नहिं मिलता, फिर फिर जननी नाहिं जनेगी।
लख चौरासी जाय पड़ोगे, तब फिर यम से रार ठनेगी॥ [1]
हरि गुण गाय परम यश ले ले, फिर तेरी नाहिं तान तनेगी।
‘पुरुषोत्तम’ यह काया माटी, फिर माटी में जाय सनेगी॥ [2]
- श्री पुरुषोत्तम जी
यदि इस दुर्लभ मनुष्य जन्म में भगवत्प्राप्ति या आत्म-कल्याण की बात न बन सकी, तो फिर कभी नहीं बनेगी; क्योंकि यह मानव शरीर बार-बार नहीं मिलता और न ही माता बार-बार जन्म देगी। यदि यह अवसर गँवा दिया तो चौरासी लाख योनियों के चक्र में गिरना पड़ेगा, जहाँ यमराज के दण्ड व क्लेश से निरंतर कलह थमी रहेगी। [1]
इसलिए समय रहते श्री हरि के गुणों का गान करके परम यश व भक्ति-रस प्राप्त कर लो, क्योंकि जीवन ढलने पर फिर यह साधन-सामर्थ्य नहीं रह जाएगी । श्री पुरुषोत्तम जी कहते हैं कि यह देह मिट्टी की बनी है और अंततः मिट्टी में ही मिल जाने वाली है। [2]
नर तन बार बार नहिं मिलता, फिर फिर जननी नाहिं जनेगी।
लख चौरासी जाय पड़ोगे, तब फिर यम से रार ठनेगी॥ [1]
हरि गुण गाय परम यश ले ले, फिर तेरी नाहिं तान तनेगी।
‘पुरुषोत्तम’ यह काया माटी, फिर माटी में जाय सनेगी॥ [2]
- श्री पुरुषोत्तम जी
यदि इस दुर्लभ मनुष्य जन्म में भगवत्प्राप्ति या आत्म-कल्याण की बात न बन सकी, तो फिर कभी नहीं बनेगी; क्योंकि यह मानव शरीर बार-बार नहीं मिलता और न ही माता बार-बार जन्म देगी। यदि यह अवसर गँवा दिया तो चौरासी लाख योनियों के चक्र में गिरना पड़ेगा, जहाँ यमराज के दण्ड व क्लेश से निरंतर कलह थमी रहेगी। [1]
इसलिए समय रहते श्री हरि के गुणों का गान करके परम यश व भक्ति-रस प्राप्त कर लो, क्योंकि जीवन ढलने पर फिर यह साधन-सामर्थ्य नहीं रह जाएगी । श्री पुरुषोत्तम जी कहते हैं कि यह देह मिट्टी की बनी है और अंततः मिट्टी में ही मिल जाने वाली है। [2]

