चरन हैं नीके हित ही - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद

चरन हैं नीके हित ही - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद

(कवित्त)
चरन हैं नीके हित ही के जन मन ही के,
संकट हरण ऋद्धि सिद्धि के धरन हैं। [1]
धरन धरा के तैं धरत ध्यान रैन दिना,
गाते जस नेति नेति आनन्द करन हैं॥ [2]
करन हैं कंज दल गंजन अरुण एड़ी,
नखन झनक कान्ति ससि की हरण हैं। [3]
हरन अधीरता के धीरता धरन हारे,
दास चित धारैं राधारानी के चरण हैं॥ [4]

- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद

श्री राधारानी के चरण अत्यंत सुंदर, हितकारी और भक्तों के मन को प्रिय लगने वाले हैं, जो सभी संकटों का हरण करने वाले तथा ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करने वाले हैं। [1]

इस पृथ्वी को धारण करने वाले (शेषनाग) भी रात-दिन जिन चरणों का ध्यान करते हैं और वेद 'नेति-नेति' कहकर जिनके यश का गान करते हैं, वे चरण परम आनंद प्रदान करने वाले हैं। [2]

जिनकी लाल एड़ियाँ कमल की पंखुड़ियों की कोमलता और सुंदरता को भी लज्जित करने वाली हैं और नखों की झिलमिलाती चमक चंद्रमा की कांति को भी फीकी करने वाली है। [3]

जो भक्त के मन की व्याकुलता को दूर कर धैर्य प्रदान करने वाले हैं, उन्हीं श्री राधारानी के चरणों को यह दास अपने हृदय में सदा धारण करता है। [4]