राधा-राधा रट रही, रसना प्रेम सुनाम।
राधा प्रेम निवासनी, राधा पूरन काम॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा प्रेम स्वरूपनी वर्णन (1)
जीभ निरंतर प्रेम में विभोर होकर सुंदर नाम 'राधा-राधा' का ही रटन कर रही है। श्री राधा साक्षात् प्रेम का धाम हैं और वे ही समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।
राधा प्रेम निवासनी, राधा पूरन काम॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा प्रेम स्वरूपनी वर्णन (1)
जीभ निरंतर प्रेम में विभोर होकर सुंदर नाम 'राधा-राधा' का ही रटन कर रही है। श्री राधा साक्षात् प्रेम का धाम हैं और वे ही समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।

