बधाई हो बाजत श्री वृषभान - श्री किशोरी अलि जी

बधाई हो बाजत श्री वृषभान - श्री किशोरी अलि जी

बधाई हो बाजत श्री वृषभान कै।
कुँवरि भई कीरति रानी के, पाई निधि बहु दान कै॥ [1]
नौबत बाजै घन ज्यों गाजै, सुख भयो सकल सुजान कै।
अलि किसोरी लखि सुख बाढ़यो, बंसी अलि प्रिय प्रान कै॥ [2]

- श्री किशोरी अलि जी

श्री वृषभान जी के द्वार पर आनंदमयी बधाई बज रही है, क्योंकि महारानी कीर्ति के यहाँ लाडली श्री किशोरी जी का प्राकट्य हुआ है और सभी ने अपार दान-रत्न रूपी निधि प्राप्त की है। [1]

बादलों की गंभीर गर्जना के समान सुंदर नौबत और वाद्य बज रहे हैं, जिससे सभी रसिक जनों को परम सुख प्राप्त हो रहा है। श्री किशोरी अलि जी कहते हैं कि वंशी अलि जी के प्राणों के समान प्रिय श्री राधा जू के इस महोत्सव की शोभा को देखकर मेरा सुख अत्यंत बढ़ गया है और ह्रदय परम आनंदित हो गया है। [2]