जाके बश में रहत हौं, अपनी प्रभुता त्याग।
प्रेमभक्ति सो लहत नर, बृन्दाबन अनुराग॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
जिस श्रीधाम वृन्दावन में भगवान् श्रीकृष्ण अपनी समस्त प्रभुता और ऐश्वर्य को त्यागकर स्वयं उसके वश में रहते हैं, ऐसे श्रीधाम वृन्दावन के प्रति जीव को अनन्य प्रेम-भक्ति के द्वारा परम अनुराग प्राप्त करना चाहिए।
प्रेमभक्ति सो लहत नर, बृन्दाबन अनुराग॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
जिस श्रीधाम वृन्दावन में भगवान् श्रीकृष्ण अपनी समस्त प्रभुता और ऐश्वर्य को त्यागकर स्वयं उसके वश में रहते हैं, ऐसे श्रीधाम वृन्दावन के प्रति जीव को अनन्य प्रेम-भक्ति के द्वारा परम अनुराग प्राप्त करना चाहिए।

