राग बहार

राग बहार उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक उल्लासपूर्ण राग है, जो वसंत ऋतु में गाया जाता है और श्रृंगार रस से परिपूर्ण होता है। इसका ठाट कल्याण, वादी स्वर मध्यम और संवादी स्वर षडज होता है। इसकी जाति औड़व-सम्पूर्ण (आरोह में 5, अवरोह में 7 स्वर) होती है और यह रात्रि के दूसरे प्रहर (रात 9 बजे से 12 बजे तक) में गाया जाता है। इसमें राग बसंत और मल्हार की झलक भी मिलती है।

1 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. वृन्दावन रस काहि न भावै - श्री जुगलप्रिया जी

    ऐसा कौन है जो वृंदावन के रस से मोहित नहीं होगा? हरे-भरे वृक्षों और वल्लरियों से सुसज्जित वृंदावन, गोवर्धन पर्वत, और श्री यमुना आदि किसी को कैसे मनमोहक नहीं लग सकते?