राग माँड़

राग माँड़ बिलावल थाट से सम्बंधित है। इस राग का भाव गंभीर और शांति से परिपूर्ण है, और इसलिए यह राग ध्यान, साधना, और शांति के लिए उपयुक्त है। यह राग भावनात्मक गहराई और समर्पण की भावना को व्यक्त करता है। राग माँड़ रात को विशेष रूप से 9 बजे से लेकर मध्य रात्रि तक, गाया जाता है।

1 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. बगुला भक्तन सों डरिये री - श्री जुगलप्रिया जी

    बगुला भक्तों (ढोंग एवं पाखंड करने वाले भक्तों) से डरना चाहिए । जिस प्रकार एक बगुला एक पैर पर खड़ा रहता है, ऐसा प्रतीत होता है मानो वह एक पैर पर खड़ा होकर ध्यान कर रहा है, परंतु जैसे ही मछली उसके पास जाती है, वह तुरंत उस पर झपटा मारता है, और उस दीन मछली को अपना शिकार बना लेता है ।