राग पंचम

राग पंचम मारवा थाट से सम्बंधित है। यह राग शांति, स्थिरता और चिंतन की भावना उत्पन्न करता है, जो विशेषतः शरद ऋतु में गाया जाता है। राग पंचम रात्रि के अंतिम प्रहर में गाया जाता है, सुबह 3 बजे से 6 बजे तक।

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  1. देखो देखो ब्रजकी बीथिनि बीथिनि खेलत हैं हरि होरी - श्री गदाधर भट्ट जी की वाणी (68)

    अरी सखी! देखो, ब्रज की हर एक गली में आनंद के सागर स्वयं हरि, प्रेमपूर्वक होली खेल रहे हैं। मधुर गीतों, हास-परिहास और लीलाओं के मध्य, हजारों सखाओं के संग वे रंगों की इस उत्सवमयी रसधारा में मग्न हो रहे हैं।