किशोरी श्यामा तुम हो परम उदार - श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (108)
हे किशोरी श्री राधा! आप तो परम उदार हैं। जो भी आपके नाम का गान करता है, वह असीम आनंद को प्राप्त करता है।
राग पटदीप काफी थाट से संबंधित है। यह राग भावनात्मक गहराई, विरह और शांति की भावना उत्पन्न करता है। राग पटदीप मध्य रात्रि को 12 बजे से 3 बजे के मध्य गाया जाता है।
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हे किशोरी श्री राधा! आप तो परम उदार हैं। जो भी आपके नाम का गान करता है, वह असीम आनंद को प्राप्त करता है।