राग श्री

राग श्री पूर्वी थाट का राग है जो भगवान शिव से सम्बंधित है । यह राग भक्ति भावना प्रधान राग होने के साथ साथ वातावरण में थोड़ी व्याकुलता भी उत्पन्न करता है । यह राग दिन के अन्तिम प्रहर (सूर्यास्त) के समय गाया जाता है ।

1 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. प्यारीजू प्यारेकौं भावै सो सहज करैं - श्री रामराय जी, आदिवाणी (1)

    प्यारे श्री श्यामसुंदर को जो भाता है, वही प्यारी श्री राधा सहज में करती हैं एवं प्यारी श्री राधा को जो सदैव भाता है, वही प्यारे श्री श्यामसुंदर करते हैं ।