राधे तेरे रूप की पटतर कहिये काहि - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (65)
हे श्रीराधे! आपके अनुपम रूप की उपमा भला किससे दी जा सकती है? आपके नयनों के कोर के कटाक्षों के वशीभूत होकर श्रीश्यामसुंदर अपना सर्वस्व न्योछावर कर पूर्णतः आपके ही होकर रह गए हैं।
राग रायसो भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रसिद्ध राग है, जो विशेष रूप से उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत में प्रसिद्ध है। इसे प्राय: सुबह के समय गाया जाता है। राग रायसो की विशेषता यह है कि यह मधुर और शांत राग है।
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हे श्रीराधे! आपके अनुपम रूप की उपमा भला किससे दी जा सकती है? आपके नयनों के कोर के कटाक्षों के वशीभूत होकर श्रीश्यामसुंदर अपना सर्वस्व न्योछावर कर पूर्णतः आपके ही होकर रह गए हैं।