यह तन यह वन जमुन तट मिल्यौ वन्यौ है दाउ - श्री हित दामोदर दास, आशा त्याग (42)
यह मानव देह, तथा वृन्दावन में यमुना तट का वास मिलना अत्यंत दुर्लभ सौभाग्य है। अतः सांसारिक आशाओं को त्यागकर, युगल किशोर का निरंतर भजन करना चाहिए।
‘आशा-त्याग’ ग्रन्थ की रचना श्री हित दामोदरदास जी द्वारा ईस्वी सन् 1656 में की गई है। ब्रज भाषा के 83 छन्दों में निबद्ध यह ग्रन्थ उनकी अंतिम कृति मानी जाती है। इसमें संसार की आशा का परित्याग कर दिव्य प्रेम की भावना को जाग्रत करने का उपदेश दिया गया है।
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यह मानव देह, तथा वृन्दावन में यमुना तट का वास मिलना अत्यंत दुर्लभ सौभाग्य है। अतः सांसारिक आशाओं को त्यागकर, युगल किशोर का निरंतर भजन करना चाहिए।