अनन्द दशा विनोद [बयालीस लीला]

अनन्द दशा विनोद 'बयालीस लीला' ग्रन्थ का अनुभाग है जिसे श्री हित ध्रुवदास द्वारा लिखा गया है जिसमें अनन्द दशा का वर्णन किया गया है।

1 लेख उपलब्ध हैं

  1. प्यार ही की कुंज और प्यार ही की सेज रची - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, आनंद दशा विनोद (44)

    प्रेम-निर्मित कुंज भवन में प्यार की एक शय्या रची है, जिस पर प्यार के साथ विराजित प्यारे प्रियतम लाल जी अपनी प्यारी प्रिया से प्रेम-प्यार की वार्ताएँ करते रहते हैं।