प्यार ही की कुंज और प्यार ही की सेज रची - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, आनंद दशा विनोद (44)
प्रेम-निर्मित कुंज भवन में प्यार की एक शय्या रची है, जिस पर प्यार के साथ विराजित प्यारे प्रियतम लाल जी अपनी प्यारी प्रिया से प्रेम-प्यार की वार्ताएँ करते रहते हैं।
