आनंद लता [बयालीस लीला]

आनंद लता श्री बयालीस लीला का एक भाग है जिसे श्री हित ध्रुवदास जी ने लिखा है ।

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  1. परम रसिक नागर नवल - श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, आनंद दशा विनोद (30)

    परम रसिक नव-नागर प्रियतम को केवल दो ही बातें प्रिय लगती हैं—प्रथम, नवल किशोरी प्रिया की छवि का दर्शन; और द्वितीय, उनके श्रीमुख से निकले मधुर वचनों का श्रवण। इसके अतिरिक्त उन्हें और कुछ भी नहीं सुहाता।