भजनाष्टक [बयालीस लीला]

भजनाष्टक श्री हित ध्रुवदास द्वारा लिखित बयालिस लीला का ग्यारहवां अध्याय है, जिसमें दिव्य युगल श्री श्यामा श्यामा और वृंदावन के दिव्य भजन रस को समर्पित आठ दोहे हैं।

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  1. सर्वोपरि है मधुर रस, जुगल-किसोर विलास - श्री ध्रुवदास, भजनाष्टक (3)

    श्री जुगल-किशोर (श्री राधा-कृष्ण) का वृंदावनीय रस विलास और उनका मधुर रस ही समस्त रसों में सर्वोपरि है जिसका ललिता आदि सखियाँ निरंतर हर्षोल्लास युक्त सेवन करती हैं ।