सरद उज्यारी रास रच्यौ पिय-प्यारी - श्री प्रियादास, भक्ति रस बोधिनी (371)
भक्तमाल की टीका में श्री प्रियादास जी, श्री हरिराम व्यास जी के जीवन के एक अनुपम प्रसंग का वर्णन करते हुए लिखते हैं — शरद पूर्णिमा की उज्ज्वल रात्रि में जब प्रियतम-प्रिया (श्री राधा-कृष्ण) ने दिव्य रास रचा, तब उसमें ऐसा गहन प्रेम-रंग चढ़ा कि उसकी मधुरता को शब्दों में बाँधना असम्भव है ।
