भक्ति रस बोधिनी

भक्ति रस बोधिनी प्रियादास द्वारा रचित नाभादास की भक्तमाल पर एक अत्यंत मूल्यवान टीका है। यह बाद की अनेक टीकाओं का आधार बनी और हिंदी साहित्य में व्यापक रूप से उद्धृत होती रही है।

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  1. सरद उज्यारी रास रच्यौ पिय-प्यारी - श्री प्रियादास, भक्ति रस बोधिनी (371)

    भक्तमाल की टीका में श्री प्रियादास जी, श्री हरिराम व्यास जी के जीवन के एक अनुपम प्रसंग का वर्णन करते हुए लिखते हैं — शरद पूर्णिमा की उज्ज्वल रात्रि में जब प्रियतम-प्रिया (श्री राधा-कृष्ण) ने दिव्य रास रचा, तब उसमें ऐसा गहन प्रेम-रंग चढ़ा कि उसकी मधुरता को शब्दों में बाँधना असम्भव है ।