भाषा दशम स्कंध [श्री नंददास जी]

भाषा दशम स्कंध श्री नंददास जी द्वारा रचित नंददास ग्रंथावली का तेरहवाँ अध्याय है, जिसमें कुल 123 रोला हैं। इस अध्याय में श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के 28 अध्यायों का अनुवाद किया गया है।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. जद्यपि नित्य किसोर हरि - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भाषा दशम स्कंध (5.2)

    यद्यपि वेद कहता है कि कमलनयन श्रीहरि शाश्वत रूप से किशोर अवस्था में ही विराजमान रहते हैं, तथापि ब्रजवासियों को बाल्य और पौगंड आदि समस्त अवस्थाओं का सुख प्रदान करने हेतु ही वे ब्रज में प्रकट हुए।

  2. गर्व करो जिनि भूलि कोउ - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भाषा दशम स्कंध (17.18)

    यदि किसी जीव के मन में घर-परिवार, जन-सम्पत्ति या वैभव का अभिमान उत्पन्न हो जाए, तो उसे स्मरण करना चाहिए कि स्वर्ग के सम्राट इंद्र का गर्व भी भगवान कृष्ण ने क्षणभर में धूल में मिला दिया था। अतः अहंकार का त्याग ही कल्याण का मार्ग है।