जद्यपि नित्य किसोर हरि - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भाषा दशम स्कंध (5.2)
यद्यपि वेद कहता है कि कमलनयन श्रीहरि शाश्वत रूप से किशोर अवस्था में ही विराजमान रहते हैं, तथापि ब्रजवासियों को बाल्य और पौगंड आदि समस्त अवस्थाओं का सुख प्रदान करने हेतु ही वे ब्रज में प्रकट हुए।
