वृहद वामन पुराण
वामन पुराण में मुख्यरूप से भगवान विष्णु के दिव्य माहात्म्य का व्याख्यान है।
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मम नाम सहस्राणि राधानाम सकृत् स्मरन् - वृहद्वामन पुराण
श्री कृष्ण कहते हैं कि मेरे एक हज़ार बार नाम को जो जपता है और श्री राधा नाम का केवल एक बार स्मरण ही कर लेता है वह भव बंधन से छूट जाता है । जो सदा श्री राधा नाम को भजता है उसे क्या फल मिलता है यह तो मैं भी नहीं जानता ।
षष्ठिवर्ष सहस्राणि मया तप्तं तपः पुरा - वृहद्वामनपुराण
श्री वृन्दावन रज इतनी दुर्लभ है कि ब्रह्मा जी बोले : मैंने पहले ही साठ हजार वर्ष तपस्या की, तो भी मैं श्री वृन्दावन की रज (एवं श्रीजी की सखियों की रज) प्राप्त नहीं कर पाया ।