होरी के कवित्त (श्री लाल बलबीर)

होरी के कवित्त श्री लाल बलबीर द्वारा रचित ग्रंथ ब्रज बिनोद का ग्यारहवां अध्याय है जिसमें होली के कवित्त का संकलन किया गया है।

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  1. श्रीबनराज निकुंज में - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, होरी के कवित्त (11)

    श्री वृन्दावन के निकुंजों में पिय-प्यारी को सुख प्रदान करने के लिए ही छहों ऋतुएँ सहचरी रूप धारण करके दिन-रात उनकी सेवा में उपस्थित रहती हैं।