केवल पैये प्रेम में प्यारो - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, जैन कुतूहल (13)
श्री हरिचंद जी कहते हैं "श्री कृष्ण न ज्ञान से प्राप्त हो सकते हैं न ध्यान से, वे सब कर्मों एवं नियमों से न्यारे हैं, उन्हें केवल प्रेम से ही पाया जा सकता है।"
जैन कुतूहल श्री भारतेंदु हरिशचंद्र द्वारा रचित भारतेंदु ग्रंथावली का सातवां अध्याय है जिसमें श्री हरि के तत्व-सिद्धांत सम्बन्धी पद सम्मिलित हैं।
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श्री हरिचंद जी कहते हैं "श्री कृष्ण न ज्ञान से प्राप्त हो सकते हैं न ध्यान से, वे सब कर्मों एवं नियमों से न्यारे हैं, उन्हें केवल प्रेम से ही पाया जा सकता है।"