लीला माधुरी [प्रेम रस मदीरा]

लीला माधुरी, प्रेम रस मदिरा का बारहवाँ अध्याय है जिसमें विशेष रूप से श्री राधा कृष्ण की सुन्दर लीलाओं का वर्णन है। रचयिता: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

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  1. अनोखी, वीणा वारी नारि - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, लीला-माधुरी (1)

    श्यामसुन्दर वीणा वाली नारी का भेष बनाये हुए हैं । जिनके सोलहों श्रृंगार के माधुर्य को देखकर अनन्त कामदेव की स्त्रियाँ बलिहार जाती हैं। वह अनोखी वीणा वाली नारी ठोढ़ी पर हाथ रखे हुए कुसुम सरोवर पर बैठी हैं।