कुँवरि बिनु, अब तो रह्यो न जाय - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, मान माधुरी (28)
हाय ! हाय !! किशोरी जी के बिना अब तो किसी प्रकार भी रहा नहीं जाता । अरी सखियों ! जो कोई किशोरी जी को मना लाये उस पर मैं अपने करोड़ों प्राण न्यौछावर कर दूँगा ।
