मन शिक्षा [श्री रघुनाथ दास]

मन शिक्षा श्री रघुनाथ दास गोस्वामी द्वारा रचित है जिसमें उन्होंने बारह छंदों से अपने मन को विभिन्न निर्देश दिए हैं । रचयिता: श्री रघुनाथ दास गोस्वामी

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. रतिं गौरीलीले अपि तपति सौन्दर्यकिरणैः - श्री रघुनाथ दास गोस्वामी, मन शिक्षा (10)

    हे मन! जो अपनी सौन्दर्य-किरणों से रति, गौरी एवं लीला को सन्तप्त करने वाली हैं, सौभाग्य समूह से जो इन्द्राणी, लक्ष्मी तथा सत्यभामा को पराजित करने वाली हैं और प्रियतम श्रीकृष्ण को वशीभूत करने में जो श्रीचन्द्रावली–प्रमुख नवतरुण ब्रजललनाओं को दूर निक्षेप कर देती हैं, उन श्रीहरिप्रेयसी श्रीराधा जी का भजन कर ।

  2. यथा दुष्टत्वं मे - श्री रघुनाथ दास गोस्वामी, मन शिक्षा (8)

    अरे मन! तू इस श्रीब्रज धाम में ऐसी दीनतामय व्याकुलता से श्रीगिरिधारी जी [श्री कृष्ण] का भजन कर, जिससे वे कृपा करके मुझ जैसे शठ का भी दुष्ट स्वभाव दूर कर दें और मुझे प्रेमामृत प्रदान करते हुए श्रीराधा का भजन का विधान करने के लिये आदेश करें ।