ब्रजमण्डल के बास की - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवपनिहारी लीला (1)
ब्रज-वास की आशा तो श्री ब्रह्माजी भी नित्य करते हैं; ऐसे जीव धन्य हैं, जिनका ब्रज में नित्य निवास है।
'नवपनिहारी लीला' श्री नारायण स्वामी द्वारा रचित 'ब्रज विहार' ग्रंथ का सतरहवाँ अध्याय है जिसमें सखीवेश धारी श्री कृष्ण एवं श्री राधा की पनघट पर जल भरने की लीला से सम्बंधित 27 पद एवं 23 दोहा संकलित हैं।
2 लेख उपलब्ध हैं
ब्रज-वास की आशा तो श्री ब्रह्माजी भी नित्य करते हैं; ऐसे जीव धन्य हैं, जिनका ब्रज में नित्य निवास है।
आज युगल सरकार पर बलिहार जाइए। आज रोम रोम की छवि (जो दिव्य आनंद एवं रस युक्त है ) पर बलिहार जाईये, जिसे देखकर नैन एक क्षण का वियोग बर्दाश नहीं कर सकते। रूप, रास, मृदुल हंसी और सुंदर मुख देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो उनकी तुलना किसी अन्य वस्तु से करने में भी लज्जा आ रही है। नारायण स्वामी,वृन्दावन के रसिक कहते हैं कि हमारे हृदय रूपी निकुंज में यह युगल सरकार अर्थात गौर श्याम वर्ण जोड़ी नित्य वास करे।