नृत्य विलास [बयालीस लीला]

नृत्य विलास बयालीस लीला ग्रन्थ का वह अध्याय है जिसमे श्री राधा रानी के अद्भुत अचिन्त्य नृत्य का वर्णन है।

1 लेख उपलब्ध हैं

  1. जुगल-प्रेम रस-सार सर - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, नृत्य विलास (47)

    रसिक युगल श्री लाड़िली-लाल के सर्वोपरि प्रेम-रस-सार के सरोवर में केवल हंस-स्वरूप रसिक ही अवगाहन करने में समर्थ होते हैं। शेष जगत के विषय-रस-रंजित कौओं और बगुलों के समान जीवन व्यतीत करने वाले भगवत-विमुख अधम जीव एक पल के लिए भी इस रस-सरोवर के समीप नहीं पहुँच पाते।