प्रातः स्मरामि [निकुंज केली माधुरी]

'प्रातः स्मरामि' निकुंज केली माधुरी का बावनवां अध्याय है, जिसकी रचना श्री अली माधुरी जी ने की है, जिसमें श्री राधा कृष्ण के प्रातः काल की लीलाओं का वर्णन किया गया है।

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  1. श्यामा जी तेरे चरनन की बलिहारी - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, प्रातः स्मरामि (9)

    हे श्यामा जू [श्री राधा], आपके चरणों पर मैं बलिहारी जाता हूँ । आपके सुंदर चरण शीतलता को प्रदान करते हैं, एवं कमल के फूल से भी अधिक कोमल है जिनकी छवि अति ही न्यारी एवं मनमोहक है ।